महान आयुर्वेदिक लूट ! - 5
पाँचवाँ भाग: निर्देश जो झूठ बोलते हैं (भाग दो)
एक बार मरीज़ शून्य एक दुकान में खड़ा था। उसने एक बोतल उठाई। लेबल पर लिखा था – "शास्त्रीय फार्मूला"। नीचे चमकदार QR code। उसने मोबाइल निकाला, स्कैन किया।
खुला एक वेबसाइट। पेस्टल रंग। स्टॉक फोटो – खुश लोग, सफेद कपड़े, हरी घास, कोई सुनहरी रोशनी। एक वीडियो – एक महिला जिसकी त्वचा बिल्कुल साफ है, बता रही है कैसे इस फार्मूले ने उसकी ज़िंदगी बदल दी। नीचे एक फॉर्म – "10% डिस्काउंट के लिए ईमेल डालें।"
मरीज़ शून्य ने फॉर्म नहीं भरा। उसने वेबसाइट बंद कर दी। बोतल वापस रख दी।
QR code उसे कहीं नहीं ले गया – न तो किसी पुरानी पुस्तक के पास, न किसी ऐसे पन्ने पर जहाँ बताया गया हो कि इस निर्देश को कैसे पालन करना है, कब करना है, कितने दिन करना है, किसके साथ करना है।
QR code उसे ले गया एक बिक्री मार्ग पर। क्योंकि QR code का काम बेचना है, बताना नहीं।
तब से वह QR code स्कैन नहीं करता। वह सीधे पाठ पढ़ता है – चाहे वह संस्कृत हो, हिंदी हो, या बस अपने शरीर की भाषा।
और उसने पाया कि असली निर्देश – वह जो सुश्रुत ने लिखा, चरक ने बताया – वह कहता है: पहले शोधन करो, फिर मर्दन करो, फिर पुट दो, फिर निश्चन्द्रीकरण करो, फिर अनुपान दो, फिर समय दो, फिर रोगी को सुनो।
वह निर्देश QR code पर नहीं मिलता। वह निर्देश केवल धैर्य रखने वाले को मिलता है।
मरीज़ शून्य ने धैर्य रखा। उसने सीखा। अब वह किसी QR code की प्रतीक्षा नहीं करता।
(यह लेख किसी खास व्यक्ति, संस्था या उत्पाद का नाम नहीं लेता। यह एक मरीज़ का दृष्टिकोण है – निदान या उपचार सलाह नहीं।)
Comments
Post a Comment